इंदौर। इंदौर में एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। बाणगंगा थाना क्षेत्र का रहने वाला संदीप पाल पिछले 7 महीनों से लापता था। उसकी पत्नी रश्मि अपने छोटे बच्चे को लेकर लगातार थाने और अधिकारियों के चक्कर काटती रही, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। रश्मि का आरोप है कि जब भी वह अपने पति की तलाश की बात करती थी, तो पुलिस यह कहकर उसे वापस लौटा देती थी कि संदीप कुछ लोगों के पैसे लेकर गायब हुआ है और वह खुद ही वापस लौट आएगा।
धीरे-धीरे पत्नी को शक होने लगा कि संदीप के घरवालों को उसकी पूरी जानकारी है और वह लगातार उनसे संपर्क में है। इसके बाद परेशान होकर रश्मि ने अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ अशोक नगर महिला थाने में दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया। हैरानी की बात यह रही कि मामला दर्ज होने के महज एक महीने के भीतर अशोक नगर पुलिस ने संदीप को भोपाल से खोज निकाला। जांच में सामने आया कि संदीप भोपाल में दरबान का काम कर रहा था और वहीं छिपकर रह रहा था।
पुलिस पूछताछ में संदीप ने बताया कि उसे डर था कि अगर वह इंदौर वापस आया तो कुछ लोग उसकी हत्या कर सकते हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि संदीप शेयर मार्केट का काम करता था और भारी आर्थिक नुकसान होने के बाद वह अचानक घर छोड़कर चला गया था। बताया जा रहा है कि उसने अपना घर तक बेच दिया था और किसी को बिना बताए गायब हो गया।
अशोक नगर पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और तकनीकी जांच के आधार पर संदीप तक पहुंच बनाई। जानकारी के मुताबिक संदीप ने अपने आधार कार्ड से नई सिम जारी करवाई थी और उसी नंबर से कुछ लोगों के संपर्क में था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतने लंबे समय तक बाणगंगा पुलिस उसे क्यों नहीं तलाश पाई।

