इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात का ऐलान किया है। भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के तहत इंदौर नगर निगम की 1,214 करोड़ 54 लाख रुपये की जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद शहर में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एपेक्स कमेटी की बैठक में इन परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई। मंजूरी मिलने के बाद अब इनके क्रियान्वयन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
स्वीकृत परियोजनाओं में करीब 907 करोड़ रुपये की जल आपूर्ति योजनाएं और 306 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में नई जल वितरण लाइनें बिछाई जाएंगी, पुराने नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और सीवरेज व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए लगभग 302 करोड़ 70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे नगर निगम पर वित्तीय बोझ कम होगा और परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से नर्मदा परियोजना फेज-4 और नई सीवरेज लाइनों के निर्माण में किया जाएगा।
नगर निगम ने बैठक में आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली, सीवरेज नेटवर्क विस्तार और अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को लेकर भी विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इन योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान तैयार करना है।
परियोजना के तहत उपचारित पानी के पुनः उपयोग पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल उद्योगों, उद्यानों और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में किया जा सकेगा। इससे न केवल ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भूजल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इंदौर की जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत और आधुनिक हो जाएगी। साथ ही, यह पहल शहर को सतत और स्मार्ट शहरी विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। तकनीकी और वित्तीय प्रस्तुति के बाद केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी।

