इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में इस मानसून अब तक 14.3 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शहर के अधिकांश तालाब और जलाशय अब भी आधे से ज्यादा खाली हैं। सामान्य से बेहतर बारिश के बावजूद जलस्तर में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होने से प्रशासन और शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार लगातार तेज बारिश के बजाय रिमझिम और रुक-रुक कर हुई वर्षा ने स्थिति बदल दी। बारिश का अधिकांश पानी तालाबों तक पहुंचने के बजाय जमीन में समा गया। यही वजह है कि जलाशयों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इंदौर में अब तक 14.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। हालांकि, शहर की औसत मानसूनी बारिश करीब 37 इंच होती है, ऐसे में अभी भी सामान्य वर्षा का बड़ा हिस्सा बाकी है।
जानकारों का कहना है कि मई और जून में हुई बारिश से जमीन पहले ही नम हो चुकी थी। इसके बाद जुलाई में ज्यादातर समय हल्की बारिश होती रही, जिससे पानी सीधे तालाबों में पहुंचने के बजाय मिट्टी ने सोख लिया। अब शहर की उम्मीदें अगस्त और सितंबर में होने वाली तेज बारिश पर टिकी हुई हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मानसून के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। पहले जहां जुलाई में तेज और लगातार बारिश होती थी, वहीं अब मानसून का प्रभाव अगस्त और सितंबर में ज्यादा दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि जलाशयों के भरने का समय भी बदलता नजर आ रहा है।
इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1973 में इंदौर में जुलाई महीने के दौरान 30 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी, जो आज भी रिकॉर्ड है। लेकिन इस बार जुलाई का मिजाज अलग रहा और तेज बारिश के बजाय हल्की फुहारों ने पूरे महीने दस्तक दी।
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक तालाबों और जलाशयों पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि आने वाले दो महीनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इंदौर को भविष्य में जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें अगस्त और सितंबर की बारिश पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि इंदौर के तालाब भरेंगे या फिर पानी की चिंता और गहराएगी।

