भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच महंगाई भत्ते और महंगाई राहत को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार ने इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है। कर्मचारियों का दावा है कि इस देरी के कारण करोड़ों रुपये का बकाया लंबित हो गया है।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। घरेलू गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ चुके हैं। ऐसे समय में कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता मिलना चाहिए था, लेकिन अब तक बढ़ी हुई दर लागू नहीं की गई है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि केंद्र सरकार फिलहाल 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दे रही है, जबकि प्रदेश में अभी भी 58 प्रतिशत की दर लागू है। उनका आरोप है कि बढ़ी हुई 2 प्रतिशत राशि समय पर नहीं मिलने से कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
संघ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पेंशनर्स को भी समय पर महंगाई राहत और बकाया राशि का लाभ मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें पूरी राहत नहीं मिल पा रही है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही है और महंगाई भत्ता सहित कई मामलों में फैसलों में देरी की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को समय पर उनका अधिकार मिलना चाहिए।
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार कर्मचारी हितैषी है और केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई महंगाई भत्ते की दर का लाभ भी जल्द प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस संबंध में उचित समय पर फैसला लिया जाएगा।

