भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार को घेरने की कोशिश के बीच अब वे खुद कानूनी विवाद में फंस गए हैं। उज्जैन के वीर भारत न्यास से जुड़े जमीन मामले में दिए गए उनके बयान पर न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है।
दरअसल, कुछ दिन पहले नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को महज एक रुपये की लीज पर आवंटित कर दी। इस दौरान उन्होंने न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। अब इन्हीं बयानों को लेकर मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने कहा कि जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। उन्होंने कहा कि वीर भारत न्यास कोई निजी ट्रस्ट नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक वैधानिक संस्था है, जिसका संचालन शासन के नियमों के अनुसार किया जाता है। ऐसे में इसे निजी संस्था बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की गई है।
अधिवक्ता हरीश मेहता ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोपों से मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार और वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की व्यक्तिगत, सामाजिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। इसी कारण उनकी ओर से जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है। नोटिस में तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से आरोप वापस लेने, माफी मांगने या लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो सक्षम न्यायालय में मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने भी कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाने और आरोप लगाने की स्वतंत्रता जरूर है, लेकिन बिना तथ्यों के किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा।
इस बीच यह भी चर्चा में है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी वीर भारत न्यास को सरकारी संस्था बताया है। उनका कहना है कि अप्रैल 2013 में मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा इस न्यास की स्थापना सार्वजनिक उद्देश्य के लिए की गई थी, न कि किसी निजी संस्था के रूप में।
गौरतलब है कि जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि उज्जैन की लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन श्रीराम तिवारी से जुड़े ट्रस्ट को एक रुपये की लीज पर दी गई है। वहीं वीर भारत न्यास और उसके सचिव श्रीराम तिवारी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अब कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना लिया है।

