लोको पायलटों का आंदोलन: परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे, 9 दिन बाद भी नहीं हुई सुनवाई

अनूपपुर। मध्य प्रदेश के बिजुरी रेलवे स्टेशन पर ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले लोको पायलटों का आंदोलन अब और उग्र हो गया है। निर्धारित मानकों के मुताबिक काम नहीं लिए जाने, शॉर्टकट तरीके से असुरक्षित संचालन कराने और मनमाने स्थानांतरण के विरोध में लोको पायलट पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे थे। लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद अब लोको पायलट अपने परिवारों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

प्रदर्शन कर रहे लोको पायलटों का आरोप है कि रेलवे प्रबंधन उनसे निर्धारित मानकों के विपरीत और असुरक्षित तरीके से काम करवा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर किसी वजह से अप्रिय स्थिति बनती है या काम में थोड़ी भी देरी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कर्मचारियों पर डाल दी जाती है और उन्हें जबरन प्रताड़ित किया जाता है। संघ की ओर से इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक यानी DRM बिलासपुर को पहले भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

लोको पायलटों के आक्रोश की एक बड़ी वजह उनके साथी एम.के. विभूति का स्थानांतरण भी है। संघ का आरोप है कि एम.के. विभूति पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए और इसके बाद उनका तबादला ब्रजराजनगर, ओडिशा कर दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि यह दंडात्मक कार्रवाई है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।

परिवार सहित धरने पर बैठे लोको पायलटों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक रेलवे प्रबंधन उनकी समस्याओं को नहीं सुनता और कथित दंडात्मक स्थानांतरण को वापस नहीं लेता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और न्याय मिलने तक यह अनिश्चितकालीन लड़ाई जारी रहेगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि 9 दिनों से चल रहे इस आंदोलन के बाद रेलवे प्रबंधन कब बातचीत के लिए आगे आता है और लोको पायलटों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।

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