भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है और अगले छह महीनों के भीतर करीब 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए कई बड़ी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही उनका लोकार्पण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला सहित 13 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने के बाद लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में सिंहस्थ महापर्व से जुड़ी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत प्रगति हुई है। वहीं शिप्रा नदी के किनारे लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण भी तेजी से चल रहा है और इसमें करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
सरकार ने केन-मंदाकिनी अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेज दिया है। करीब 8400 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। इसके साथ ही 15.8 मेगावाट बिजली उत्पादन भी होगा और 20 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में सिंचित क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं को जोड़ने पर मध्य प्रदेश का सिंचित रकबा 95 लाख 45 हजार हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। वहीं अन्य स्वीकृत परियोजनाएं पूरी होने के बाद यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है। पिछले ढाई वर्षों में ही प्रदेश में करीब 10 लाख हेक्टेयर नए सिंचाई क्षेत्र का विस्तार किया गया है।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना से बुंदेलखंड के 10 जिलों में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी और 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा। वहीं भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज के तहत 90 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि यह काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा छिंदवाड़ा की चतुर्थ बांध परियोजना समेत कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली ऐतिहासिक स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह टनल बरगी बांध से निकलने वाली नहर के जरिए जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के करीब 1500 गांवों की ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी। सरकार का कहना है कि इस परियोजना के शुरू होने से हजारों किसानों को सिंचाई की बड़ी सुविधा मिलेगी और प्रदेश में कृषि उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी।

