अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। इसके साथ ही कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चंपत राय के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के भीतर अलग-अलग राय सामने आईं। कुछ पदाधिकारियों का मानना था कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पाराशरण की राय थी कि इस्तीफा स्वतः प्रभावी माना जा सकता है। विस्तृत चर्चा के बाद ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों के इस्तीफे स्वीकार करने का निर्णय लिया।
ट्रस्ट ने यह भी जानकारी दी कि अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित की जाएगी। तब तक विशेष जांच दल यानी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है। रिपोर्ट मिलने के बाद नए ट्रस्टी की नियुक्ति सहित आगे की प्रक्रिया पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कार्यवाहक महासचिव का पद संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से केवल रामभक्त ही नहीं, बल्कि पूरा ट्रस्ट भी आहत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कृष्ण मोहन ने यह भी स्वीकार किया कि मंदिर के संचालन और प्रबंधन व्यवस्था में कुछ कमियां थीं, जिनके कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता उन सभी कमियों को दूर करने की होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
उन्होंने कहा कि इस विवाद से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है, इसलिए अब चढ़ावे और उससे जुड़े प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाई जाएगी। श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और उसके उपयोग से जुड़ी जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी, ताकि रामभक्तों का विश्वास पूरी तरह बना रहे।

