ग्वालियर सड़क निर्माण में बड़ा फर्जीवाड़ा! हाई कोर्ट की जांच में सैंपल फेल, PWD लैब प्रभारी बोले- ‘ये रिपोर्टें हमने बनाई ही नहीं’

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश पर चल रही जांच में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। हाई कोर्ट के आदेश पर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में सामने आया है कि कई सड़कों से लिए गए सैंपल गुणवत्ता के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इतना ही नहीं, कुछ सड़कों की डीपीआर में लगाई गई PWD की लैब रिपोर्ट भी अब सवालों के घेरे में आ गई हैं। संबंधित लैब प्रभारी ने शपथपत्र देकर इन रिपोर्टों को तैयार करने, जारी करने और प्रमाणित करने से ही इनकार कर दिया है।

दरअसल, हाई कोर्ट के निर्देश पर 19 अगस्त को ग्वालियर की तीन सड़कों से सैंपल लिए गए थे। इनमें श्मशान से गुड़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक से गुड़ा-गुड़ी का नाका और गुड़ा-गुड़ी का नाका से बेटी बचाओ चौराहा होते हुए हनुमान टॉकीज तक जाने वाली सड़क शामिल थी। जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सड़कों से लिए गए सैंपल गुणवत्ता के मानकों पर विफल पाए गए हैं। खास तौर पर बेटी बचाओ मार्ग की निर्माण गुणवत्ता को लेकर रिपोर्ट में गंभीर सवाल सामने आए हैं।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच आयोग को दो सड़कों की डीपीआर में PWD की जोनल रिसर्च लैब के नाम से कुछ रिपोर्ट मिलीं। जब इन रिपोर्टों में दर्ज क्रमांकों की तुलना लैब के मूल वर्षवार रजिस्टर से की गई, तो कई नंबर मूल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए। इसके बाद 29 अगस्त को संबंधित लैब प्रभारी ने शपथपत्र देकर कहा कि ये रिपोर्टें उनकी लैब ने न तो तैयार की हैं, न जारी की हैं और न ही प्रमाणित की हैं। यहां तक कि इन रिपोर्टों को लैब के मूल रिकॉर्ड का हिस्सा भी नहीं बताया गया है।

इस खुलासे के बाद अब सवाल सिर्फ सड़क की गुणवत्ता पर नहीं है, बल्कि सड़कों की डीपीआर में लगाई गई लैब रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी उठ रहे हैं। आखिर ऐसी रिपोर्टें डीपीआर में कैसे शामिल हुईं और इन्हें किसने तैयार किया, यह जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

जांच के दौरान एक सड़क की पुरानी डीपीआर से जुड़ी माप पुस्तिका भी उपलब्ध नहीं मिली। इस मामले में नगर निगम की ओर से तीन कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि के दौरान सड़क की मरम्मत कराने के लिए नोटिस दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

अब हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र पर जवाब मांगा है और निगम को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन जांच आयोग की रिपोर्ट में सैंपल फेल होने और कथित तौर पर फर्जी बताई गई लैब रिपोर्ट का मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार विभागों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं आज हाई कोर्ट में कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहा तक की सड़क से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट को लेकर भी सुनवाई होनी है। अब देखना होगा कि कोर्ट के सामने आने वाली रिपोर्ट और नगर निगम के जवाब के बाद इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई होती है।

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