मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में बारिश की लंबी खेंच ने किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश का दौर थमने के बाद अब इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए लोगों ने एक बार फिर पुरानी लोक परंपरा का सहारा लिया है। मंदसौर शहर के चंद्रपुरा क्षेत्र में बुधवार रात बारिश की कामना को लेकर एक अनोखा अनुष्ठान किया गया।
चंद्रपुरा क्षेत्र के लोग रात में श्मशान घाट पहुंचे। यहां गधों को फूलों की माला पहनाई गई और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गधों से खेत में नमक और उड़द की बुवाई कराई गई। इस अनुष्ठान के दौरान दो व्यक्ति भी गधों के पीछे नग्न अवस्था में माला पहनकर चले।
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है। लोगों का विश्वास है कि इस तरह के अनुष्ठान से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और गधों के अपने ठिकाने पर वापस पहुंचने से पहले ही बारिश शुरू हो जाती है। हालांकि यह एक स्थानीय लोक मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
इतना ही नहीं, इस परंपरा में बारिश होने के बाद गधों को सम्मानित करने की भी मान्यता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब अच्छी बारिश हो जाती है तो इन गधों को दोबारा खोजकर निकाला जाता है। इसके बाद उन्हें फूल-माला पहनाई जाती है और गुलाब जामुन खिलाकर उनका सम्मान किया जाता है।
स्थानीय लोगों और पार्षद प्रतिनिधि शैलेन्द्र गिरी गोस्वामी के मुताबिक, इससे पहले साल 2023 और 2025 में भी बारिश का संकट गहराने पर इसी तरह का अनुष्ठान किया गया था। इस साल भी बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
बताया जा रहा है कि इस साल मंदसौर जिले में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी के कारण फसलों पर संकट मंडराने की आशंका है और इसी चिंता के बीच ग्रामीणों ने एक बार फिर अपनी पुरानी लोक परंपरा को दोहराया है।
अब यह अनोखा अनुष्ठान बारिश लेकर आता है या नहीं, यह तो मौसम ही बताएगा, लेकिन मंदसौर में बारिश के लिए निभाई गई यह परंपरा एक बार फिर चर्चा का विषय जरूर बन गई है।

