भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सभी विभागों, प्रकोष्ठों और विभिन्न स्तर की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी अब संगठन के व्यापक पुनर्गठन की तैयारी में जुट गई है। यह फैसला दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद लिया गया, जिसके बाद प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए।
हालांकि सभी इकाइयों को भंग नहीं किया गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी, जिला कांग्रेस कमेटियां, युवा कांग्रेस, सेवादल, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई पहले की तरह काम करती रहेंगी। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में गठित आदिवासी मामलों की समिति और प्रियव्रत सिंह के नेतृत्व वाली युवा मामलों की समिति भी फिलहाल यथावत रहेंगी।
वहीं अल्पसंख्यक कांग्रेस, एससी कांग्रेस, आदिवासी कांग्रेस और मीडिया विभाग सहित 40 से अधिक विभागों और प्रकोष्ठों को पूरी तरह भंग कर दिया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी अब नए सिरे से संगठन खड़ा करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार करने की रणनीति पर काम करेगी।
इधर कांग्रेस के इस फैसले पर भाजपा ने भी तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी चरम पर है और पार्टी को अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले संगठन सृजन अभियान में पदों को लेकर सवाल उठे थे और अब नए गठन में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका है।
कांग्रेस के इस बड़े संगठनात्मक फैसले के बाद अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नए संगठन में किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और पार्टी किस रणनीति के साथ आगामी चुनावी मुकाबलों की तैयारी करती है।

