भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी सीट के लिए मछुआ कल्याण बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के इस फैसले के बाद अब राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला पूरी तरह दिलचस्प हो गया है और सभी की नजरें चुनावी गणित के साथ संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिक गई हैं।
दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। विधानसभा में कांग्रेस के पास कागजों पर 64 विधायक हैं, लेकिन कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान नहीं कर पाएंगे। वहीं विधायक निर्मला सप्रे का रुख भी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। लंबे समय से निर्मला सप्रे भाजपा के साथ नजर आ रही हैं, जिससे कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर लगभग 62 विधायकों तक सिमटती दिखाई दे रही है।
ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास अपनी एक सीट निकालने के लिए जरूरी वोट तो मौजूद हैं, लेकिन अतिरिक्त वोटों की स्थिति बेहद कमजोर मानी जा रही है। दूसरी ओर भाजपा के पास अपने विधायकों के साथ निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के एक विधायक का समर्थन जोड़कर करीब 166 वोटों का आंकड़ा माना जा रहा है।
राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक भाजपा अपनी दो सीटें आसानी से जीत सकती है। दो सीटों पर 116 वोट खर्च होने के बाद भी पार्टी के पास लगभग 50 वोट शेष रहेंगे। हालांकि तीसरी सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी, यानी भाजपा को अभी भी करीब 8 अतिरिक्त वोटों की तलाश रहेगी। यही वजह है कि तीसरी सीट का मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
इधर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का आज अंतिम दिन है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन सुबह 11 बजे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल करेंगी। कांग्रेस इस मौके पर शक्ति प्रदर्शन की भी तैयारी कर रही है और अपने सभी विधायकों को भोपाल में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं भाजपा उम्मीदवार महेश केवट दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उनके साथ मौजूद रहेंगे। भाजपा भी इस नामांकन को राजनीतिक संदेश के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने के बाद यह चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। तीसरी सीट को लेकर दोनों दलों की रणनीतियां तेज हो चुकी हैं और अब सबकी निगाहें नामांकन के बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों, विधायकों की एकजुटता और संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

