इंदौर। धार की ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जहां हिंदू समाज में उत्साह का माहौल है, वहीं अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी ASI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया है कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है और श्रद्धालुओं की भावनाओं की लगातार अनदेखी हो रही है।
सबसे बड़ा विवाद उस टिकट को लेकर खड़ा हो गया है जिस पर आज भी “कमाल मौलाना मस्जिद” लिखा हुआ दिखाई दे रहा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि जब हाईकोर्ट भोजशाला को मंदिर मान चुका है, तो फिर टिकट और व्यवस्थाओं में अब तक बदलाव क्यों नहीं हुआ। संगठन ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को आज भी एक रुपए का टिकट लेकर दर्शन करने पड़ रहे हैं और फैसले के बाद भी पुरानी व्यवस्था जारी है। इसे हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है।
मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल और एडवोकेट विनय जोशी ने ASI को मेल और पत्र भेजकर कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि उत्खनन के दौरान मिली देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और धार्मिक अवशेष अब भी एक कमरे में पीली पन्नी से ढंककर रखे हुए हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि इन मूर्तियों को विधिवत स्थापित किया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर सकें, लेकिन ASI इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा।
इतना ही नहीं, भोजशाला परिसर के कई कमरे अब भी बंद बताए जा रहे हैं। हिंदू संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि पूरे परिसर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए और सभी कमरों को सार्वजनिक किया जाए। इस बीच ASI के एक अधिकारी का कथित बयान भी विवाद का कारण बन गया है। आरोप है कि जब उनसे पूछा गया कि कमरे क्यों नहीं खोले गए, तो उन्होंने कहा, “आप मंदिर-वंदिर के चक्कर में कहां पड़े हो… भोपाल से जो तय होगा वही होगा…” इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।
अब यह मामला सिर्फ कोर्ट के फैसले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उसके पालन को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू पक्ष ने साफ चेतावनी दी है कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो कानूनी लड़ाई के साथ बड़ा जन आंदोलन भी शुरू किया जाएगा। भोजशाला को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अब सबकी नजर प्रशासन और ASI की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

