बालाघाट में बीमारी की आहट मिलते ही सरकार का बड़ा एक्शन! दुर्गम गांवों तक पहुंचीं 57 मेडिकल टीमें, 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच

बालाघाट में बीमारी की आहट मिलते ही सरकार का बड़ा एक्शन! दुर्गम गांवों तक पहुंचीं 57 मेडिकल टीमें, 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच
भोपाल/बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में बच्चों में बीमारी और मौतों के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। सरकार के निर्देश पर जिला स्तर की रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य दलों को प्रभावित और दुर्गम इलाकों में भेजा गया।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 57 स्वास्थ्य दलों ने करीब 50 गांवों में पहुंचकर 43 हजार से अधिक लोगों की जांच की। सरकार की ओर से इलाज के साथ-साथ मलेरिया, डायरिया और खसरा-रूबेला जैसी बीमारियों की रोकथाम पर भी फोकस किया गया।
43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच, सैकड़ों बच्चे अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 43,451 लोगों की जांच हुई, जिनमें से 6,537 लोगों का घर पर ही उपचार किया गया। गंभीर स्थिति वाले 647 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रभावित बिरसा विकासखंड में खसरा-रूबेला संक्रमण की रोकथाम के लिए 35,827 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वहीं दस्त से बचाव के लिए 1.63 लाख से अधिक परिवारों को ओआरएस और जिंक के पैकेट वितरित किए गए।
26 हजार से ज्यादा लोगों की मलेरिया जांच
बालाघाट में मलेरिया नियंत्रण के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। करीब 26,865 लोगों की मलेरिया जांच की गई, जिसमें 980 लोग संक्रमित पाए गए। संक्रमित मरीजों का उपचार शुरू कराया गया।
इसके अलावा 8,610 घरों में कीटनाशक का छिड़काव और फॉगिंग की गई। प्रभावित क्षेत्रों में करीब 3,600 मच्छरदानियां भी वितरित की गईं।
बालाघाट में मीजल्स और मलेरिया को बच्चों की मौत से जुड़े प्रमुख कारणों में पाया गया था। अगस्त में सामने आई जांच के मुताबिक प्रभावित बच्चों में मीजल्स की पुष्टि हुई थी और कई बच्चों को खसरा का टीका नहीं लगा था।
स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर
बीमारी के संकट के बीच सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान और कर्मचारियों की तैनाती की। जिले में नए मेडिकल अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। सितंबर में सरकार ने बालाघाट में 67 मेडिकल अधिकारियों की तैनाती और नए स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार की जानकारी दी थी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप-स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं बाल रोगियों के लिए उपलब्ध बेड की संख्या बढ़ाकर 150 और PICU बेड की संख्या 21 किए जाने की जानकारी सामने आई है। मलेरिया नियंत्रण के लिए सलाहकार, तकनीकी सुपरवाइजर और कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर भी तैनात किए गए हैं।
22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों के सुधार की योजना
सरकार की योजना के तहत जिले के 22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने पर भी काम किया गया। घुम्मुर उप-स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बदलने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इसके साथ ही गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिलाओं और बच्चों के सुरक्षित परिवहन, टीकों के सुरक्षित परिवहन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया।
बारिश के बीच दुर्गम गांवों तक पहुंचीं टीमें
बालाघाट के बिरसा विकासखंड के बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका, डंडेकसा और सोनगुड्डा सहित कई गांवों से बच्चों में बुखार और दाने जैसी शिकायतें सामने आने के बाद स्वास्थ्य टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का रुख किया।
भारी बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मेडिकल टीमें गांवों तक पहुंचीं और बच्चों की जांच एवं उपचार शुरू किया। इसी दौरान राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ टीमों ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
23 साल में स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव का दावा
सरकार ने बालाघाट के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले 23 वर्षों में हुए बदलावों के आंकड़े भी सामने रखे हैं। सरकारी दावों के अनुसार वर्ष 2003 की तुलना में 2026 में संस्थागत प्रसव, सुरक्षित प्रसव और पूर्ण टीकाकरण के आंकड़ों में बड़ा सुधार हुआ है।
संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 2003 के 21.50 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 92.10 प्रतिशत और सुरक्षित प्रसव 41.50 प्रतिशत से बढ़कर 94.10 प्रतिशत बताया गया है। वहीं पूर्ण टीकाकरण 47.50 प्रतिशत से बढ़कर 92.70 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया गया है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर भी फोकस
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बालाघाट में मातृ और शिशु मृत्यु के मामलों में भी पिछले दो दशकों में कमी आई है। हालांकि इन आंकड़ों और उनसे निकाले गए ‘बचाई गई जानों’ के अनुमान को सरकारी दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बालाघाट में मौजूदा स्वास्थ्य संकट के बीच सरकार का फोकस अब बीमारी के तत्काल इलाज के साथ-साथ टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने पर है। सितंबर में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों को दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने और बच्चों के पूर्ण टीकाकरण पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए थे।

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