स्वच्छता में नंबर-1, लेकिन पानी में लापरवाही? इंदौर में नलों से बह रहा काला पानी, 400 परिवारों की सेहत पर मंडराया खतरा

 इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों पेयजल संकट को लेकर चर्चा में है। शहर के मूसाखेड़ी क्षेत्र स्थित अजय बाग कॉलोनी में पिछले दो महीनों से नलों से काला और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि करीब 400 परिवार दूषित पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं और कई लोगों के बीमार होने की बात भी सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर सुबह पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद करीब 10 से 15 मिनट तक नलों से काले रंग का और तेज दुर्गंध वाला पानी निकलता है। पानी की स्थिति ऐसी है कि उसका उपयोग पीने तो दूर, घरेलू कामों के लिए भी करना मुश्किल हो गया है।

रहवासियों के मुताबिक, गंदे पानी की वजह से कई घरों में लोग बीमार पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर है। कॉलोनी के अधिकांश परिवार नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर हैं और उनके पास बोरिंग जैसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में दूषित पानी उनकी मजबूरी बन गया है।

लोगों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और नगर निगम के 311 एप पर दर्ज शिकायतों को भी बिना समाधान के बंद कर दिया गया। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम को मिलने वाली पानी से जुड़ी शिकायतों में करीब 10 प्रतिशत शिकायतें गंदे पानी की होती हैं। निगम भी मान चुका है कि कई इलाकों में पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनें इस समस्या की बड़ी वजह हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब समस्या और उसका कारण दोनों प्रशासन के सामने हैं, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?

अब मूसाखेड़ी के 400 परिवार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि साफ और सुरक्षित पेयजल की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इंदौर को स्वच्छता में नंबर-1 कहा जाता है, तो यह सम्मान तभी सार्थक होगा, जब शहर के हर नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पानी भी उपलब्ध कराया जाए।

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