भोपाल। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे पर रहने वाली हैं। उनके इस महत्वपूर्ण दौरे को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान प्रदेश के कई शहरों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगी और धार्मिक, शैक्षणिक तथा सामाजिक आयोजनों में सहभागिता करेंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज बैतूल पहुंचेंगी, जहां वे ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “एम्पावरमेंट ऑफ ट्राइबल सोसायटी बाय स्पिरिचुअल अवेकनिंग” कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इसके बाद 19 जून को वे ओंकारेश्वर पहुंचकर अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगी।
20 जून को राष्ट्रपति जबलपुर का दौरा करेंगी। वहीं 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में भाग लेने के साथ-साथ रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में भी शामिल होंगी। इसके बाद 22 जून को उनका कूनो नेशनल पार्क भ्रमण प्रस्तावित है। कूनो दौरे के बाद वे ग्वालियर पहुंचेंगी और वहां से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
राष्ट्रपति के इस दौरे को देखते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न स्थानों पर उनके स्वागत और विदाई की जिम्मेदारी संभालने के लिए मिनिस्टर-इन-वेटिंग नियुक्त किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इंदौर में राष्ट्रपति की अगवानी की जिम्मेदारी मंत्री तुलसीराम सिलावट को दी गई है, जबकि विदाई के समय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मौजूद रहेंगे।
बैतूल में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल राष्ट्रपति के स्वागत और समन्वय की जिम्मेदारी निभाएंगे। खंडवा और ओंकारेश्वर दौरे के दौरान मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी को मिनिस्टर-इन-वेटिंग बनाया गया है। जबलपुर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा राष्ट्रपति की अगवानी और विदाई दोनों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इसके अलावा रीवा में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि ग्वालियर में एक बार फिर मंत्री तुलसीराम सिलावट राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए नियुक्त किए गए हैं।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सभी जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं और कार्यक्रम स्थलों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राष्ट्रपति के इस दौरे को प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और पर्यावरण से जुड़े कई बड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

