मध्य प्रदेश में UCC की तैयारी तेज, CM मोहन यादव बोले- मुस्लिम समाज से भी मिल रहे सकारात्मक सुझाव

इंदौर। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार शीतकालीन सत्र से पहले यूसीसी विधेयक को विधानसभा में लाकर पारित कराने का प्रयास करेगी। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब देश एक है, संविधान एक है और सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं, तो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानूनों की व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी को लेकर राज्य सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेशभर में विभिन्न वर्गों से सुझाव एकत्र कर रही है। अब तक लाखों लोगों के सुझाव प्राप्त हो चुके हैं और लगातार सुझाव आने का सिलसिला जारी है। सरकार इन सभी सुझावों का गहन अध्ययन कर रही है ताकि एक संतुलित और न्यायपूर्ण मसौदा तैयार किया जा सके।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केवल एक वर्ग ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज से भी बड़ी संख्या में सकारात्मक और महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसा कानून बनाने का प्रयास कर रही है जो सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और समान अधिकार सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की कोशिश है कि शीतकालीन सत्र से पहले यूसीसी विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाए। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन प्रमुख राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

यूसीसी को लेकर प्रदेशभर में सर्वे अभियान भी शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गांव-गांव जाकर नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सर्वे के दौरान नाम, पता, धर्म, जिला और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियों के साथ 12 महत्वपूर्ण सवालों पर लोगों की राय ली जा रही है। अधिकांश प्रश्न महिलाओं के अधिकार, विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों से जुड़े हैं।

इस अभियान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिदिन निर्धारित संख्या में फॉर्म भरवाने का लक्ष्य दिया गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों की राय सरकार तक पहुंच सके। सर्वे की प्रक्रिया की निगरानी भी की जा रही है और संबंधित अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी केवल कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक समानता और न्याय से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए सरकार हर सुझाव को गंभीरता से लेकर ऐसा प्रारूप तैयार करेगी जो सभी नागरिकों के हितों की रक्षा कर सके। अब प्रदेश की नजर समिति की रिपोर्ट और आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।

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