भोपाल। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मस्जिद से जुड़े विवाद ने अब मध्य प्रदेश तक सियासी और धार्मिक बहस को हवा दे दी है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी दो मंजिला मस्जिद को कोर्ट के आदेश पर गिराए जाने के बाद मलबे के नीचे करीब 20 फीट गहरा कुआं मिला। कुआं सामने आने के बाद अब इसको लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
मध्य प्रदेश से अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद ने इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI और उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा है। परिषद ने पूरे परिसर की जांच कराने और कुएं की ऐतिहासिक स्थिति का पता लगाने की मांग की है।
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद ने पत्र में दावा किया है कि सहारनपुर क्षेत्र महाभारत कालीन कुरुक्षेत्र का हिस्सा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि जिस जगह पर मस्जिद बनी थी, वहां पहले कोई प्राचीन मंदिर रहा हो सकता है।
अनिलानंद का कहना है कि कुआं मिलने से इस आशंका को बल मिलता है। उन्होंने पत्र में यह भी दावा किया कि मंदिरों के पास कुएं होने की परंपरा रही है और इसी आधार पर इस मामले की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। परिषद ने उत्तर प्रदेश में पुराने मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाए जाने का दावा करते हुए सहारनपुर के मामले को भी उसी कड़ी से जोड़ने की आशंका जताई है।
हालांकि, ये दावे अभी जांच का विषय हैं और कुएं की मौजूदगी मात्र से यह साबित नहीं होता कि वहां पहले मंदिर ही था। इसी वजह से ASI की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि कुएं और पूरे परिसर की वास्तविक ऐतिहासिक स्थिति सामने आ सके।
दरअसल, बीते 6 सितंबर को कोर्ट के आदेश पर सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी दो मंजिला मस्जिद को बुलडोजर से गिराया गया था। इसके बाद मलबा हटाने के दौरान करीब 20 फीट गहरा कुआं मिला और यहीं से विवाद ने नया मोड़ ले लिया। बताया जा रहा है कि एसडीएम की ओर से भी कुएं की जांच के लिए ASI को पत्र लिखा गया है।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर मुस्लिम पक्ष ने अलग सवाल उठाए हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह आखिर चाहती क्या है। उन्होंने हिंदूवादी संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें ऐसी मस्जिदों पर आपत्ति है तो वे एक साथ उन सभी मस्जिदों की सूची दें, जिन्हें वे कथित षड्यंत्र के तहत गिराना चाहते हैं।
शमशुल हसन का आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए एक के बाद एक ऐसी कवायद सामने आ रही है, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि पुरानी मस्जिदों में वजू के लिए कुआं होना सामान्य बात है और सिर्फ कुआं मिलने के आधार पर उसे मंदिर से जोड़ना सही नहीं है।
फिलहाल प्रशासन ने मिले हुए कुएं को सुरक्षित कर दिया है और अब ASI की जांच का इंतजार है। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह कुआं कितना पुराना है, इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है और मस्जिद के नीचे इसके होने की वास्तविक वजह क्या थी।
अब बड़ा सवाल यही है कि ASI की जांच इस पूरे विवाद पर क्या तस्वीर सामने लाती है और क्या इस कुएं से जुड़े दावों को कोई ऐतिहासिक प्रमाण मिलता है। फिलहाल सहारनपुर का यह मामला उत्तर प्रदेश से निकलकर मध्य प्रदेश तक पहुंच चुका है और जांच रिपोर्ट का सभी को इंतजार है।

