इंदौर। इंदौर में कांग्रेस के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। कार्यक्रम से पहले बीजेपी प्रवक्ता राकेश यादव ने इंदौर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में कार्यक्रम की पारदर्शिता, फंडिंग, रजिस्ट्रेशन, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप और सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए छात्रों या अन्य लोगों को आर्थिक सहायता देने की कोशिश की जा सकती है। इसके अलावा कार्यक्रम के लिए किए गए करीब एक लाख रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों की सत्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में यह भी आरोप है कि कुछ विशेष क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की रणनीति अपनाई जा सकती है, जिससे शहर के माहौल पर असर पड़ने की आशंका है।
बीजेपी की शिकायत में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप लगाया गया है कि बड़ी भीड़ के कारण शहर में शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और प्रशासन के सामने सुरक्षा से जुड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। इसके साथ ही कार्यक्रम की फंडिंग और आयोजन के आर्थिक स्रोतों की जांच की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस या एसआईटी के जरिए वित्तीय लेन-देन की जांच कराने की मांग रखी है।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि छात्रों के नाम पर आयोजित कार्यक्रम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है और शैक्षणिक मंच के कथित दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। साथ ही भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की गई है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कार्यक्रम स्थल और आयोजकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के साथ जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और इन आरोपों पर कांग्रेस का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
दरअसल, राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले शहर में राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ रही है। देर रात राहुल गांधी के विरोध में ‘झूठ की गूंज’ लिखे पोस्टर सामने आए थे और अब बीजेपी की ओर से पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत दी गई है। वहीं कांग्रेस की ओर से इस शिकायत को राजनीतिक विरोध और कार्यक्रम को लेकर बीजेपी की चिंता के तौर पर बताया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि पुलिस इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है।

