इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर-खंडवा रेल लाइन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए चोरल के घने जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने जा रही है। आगामी अक्टूबर महीने से रेलवे ट्रैक के रास्ते में आने वाले करीब ढाई लाख पेड़ों को काटने का काम शुरू किया जाएगा। हालांकि, पर्यावरण और वन संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह काम एक साथ नहीं होगा, बल्कि अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
पेड़ों की कटाई और जंगल से लकड़ी को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वन विभाग और रेलवे ने पूरा प्लान तैयार किया है। रेलवे की ओर से चिन्हांकित हिस्सों के आधार पर अलग-अलग चरणों में पेड़ काटे जाएंगे, ताकि एक साथ जंगल के बड़े हिस्से पर असर न पड़े।
कटाई के बाद लकड़ी के परिवहन के लिए करीब 25 विशेष ट्रकों को लगाया जाएगा। ये ट्रक लगातार कई फेरे लगाकर जंगल से लकड़ी को निर्धारित डिपो तक पहुंचाएंगे। बड़ी मात्रा में जमा होने वाली लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जंगल के बाहर बड़े स्थान का चयन भी किया जा रहा है।
वहीं कीमती लकड़ियों की सुरक्षा और अवैध कटाई को रोकने के लिए 25 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के नियमों के तहत बारिश के चार महीनों में पेड़ों की कटाई पूरी तरह बंद रहेगी।
अब सवाल उठता है कि लाखों पेड़ों की कटाई से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई कैसे होगी? वन विभाग के मुताबिक, रेलवे ने वन भूमि और पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की राशि विभाग को दी है। इसके तहत जितने पेड़ काटे जाएंगे, उससे दोगुने यानी करीब 5 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे।
वन विभाग इन पौधों की अगले पांच वर्षों तक देखभाल और संवर्धन भी करेगा, ताकि धीरे-धीरे नए हरित क्षेत्र को विकसित किया जा सके। यानी एक तरफ इंदौर-खंडवा रेल परियोजना के लिए चोरल के जंगलों में ढाई लाख पेड़ों की कटाई होगी, तो दूसरी तरफ इसकी भरपाई के लिए पांच लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। अब असली चुनौती इन पौधों को पेड़ बनने तक सुरक्षित रखने और चोरल के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने की होगी।

