मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को सिंगरौली की कोयला खदान और फर्जी गेहूं-धान खरीदी का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सिंगरौली में हाथियों के विचरण क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील जमीन को कोयला खनन के लिए आवंटित किया गया है।
इस पर सरकार और वन विभाग ने सदन में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि खदान आवंटन में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। सरकार के मुताबिक, सिंगरौली में 1,397 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि खनन के लिए आवंटित की गई है, लेकिन यह क्षेत्र एलिफेंट कॉरिडोर के अंतर्गत नहीं आता। सरकार ने दावा किया कि वास्तविक हाथी कॉरिडोर खदान क्षेत्र से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित है और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं।
हालांकि, इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने मध्य प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले पर सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
वहीं, सदन में जबलपुर जिले के मझौली क्षेत्र में फर्जी गेहूं और धान खरीदी का मुद्दा भी गरमाया। भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने किसानों को भुगतान न मिलने का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि जांच में फर्जी खरीदी के मामले सामने आए हैं, जिसकी वजह से 174 किसानों का भुगतान प्रभावित हुआ। मंत्री ने बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और संबंधित वेयरहाउस के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की गई, जिसके बाद 122 लोगों को अपात्र घोषित किया गया। हालांकि, विधायक अजय विश्नोई ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि घोटाले से जुड़े लोगों को ही जांच में शामिल कर लिया गया था।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मामले की दोबारा जांच कराने की घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी, जिसमें विधायक अजय विश्नोई को भी शामिल किया जाएगा।
इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केवल एक क्षेत्र के लिए समिति बनाना और बाकी प्रभावित किसानों की अनदेखी करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव कर रही है।
इस तरह विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार का दिन सिंगरौली की कोयला खदान, एलिफेंट कॉरिडोर और किसानों के भुगतान जैसे मुद्दों को लेकर काफी हंगामेदार रहा।

