संसद में उठा धर्मांतरण का मुद्दा, सख्त कानून और आरक्षण खत्म करने की मांग

भोपाल। संसद में जनजातीय समाज से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर जोरदार आवाज उठी है, जहां बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने देशभर में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े केंद्रीय कानून की मांग की है, उन्होंने सदन में कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है लेकिन छल, बल, प्रलोभन या दबाव के जरिए किया गया धर्मांतरण एक गंभीर अपराध है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता

डॉ. सोलंकी ने जनजातीय क्षेत्रों में बढ़ रही धर्मांतरण की घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सुनियोजित तरीके से आर्थिक लालच, शिक्षा, नौकरी, इलाज और सामाजिक दबाव जैसे माध्यमों से लोगों को प्रभावित किया जा रहा है, जो न सिर्फ आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा है बल्कि सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ा रहा है लेकिन वर्तमान हालात में उनकी मूल पहचान पर संकट गहराता जा रहा है, गांवों में सामाजिक तनाव भी बढ़ रहा है जो भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है

सांसद ने यह भी कहा कि भले ही कुछ राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए कानून मौजूद हैं लेकिन पूरे देश में एक समान और प्रभावी केंद्रीय कानून की जरूरत है, जिससे इस समस्या पर सख्ती से नियंत्रण किया जा सके, उन्होंने सुझाव दिया कि जबरन या लालच देकर किए गए धर्मांतरण पर कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए

इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो लोग धर्मांतरण कर चुके हैं उन्हें जनजातीय आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए ताकि असली पात्रों के अधिकार सुरक्षित रह सकें, उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की मांग भी रखी ताकि जनजातीय समाज के हितों को और मजबूत किया जा सके

उन्होंने 24 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह स्पष्ट व्यवस्था अनुसूचित जाति वर्ग के लिए की गई है, उसी तरह की व्यवस्था जनजातीय समाज के लिए भी लागू होनी चाहिए, अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और जबरन धर्मांतरण पर प्रभावी रोक सुनिश्चित की जाए

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