गौ रक्षा पर शंकराचार्य का बड़ा बयान, धर्मयुद्ध यात्रा का ऐलान, संतों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

जगद्गुरु शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati ने गौ माता की रक्षा को लेकर बड़ा बयान देते हुए ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू करने की बात कही है, इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को पहले 40 दिन का समय दिया गया था लेकिन उस अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके बाद अब यह आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया है।

उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा इस देश के हर नेता की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, साथ ही उन्होंने साफ कहा कि देश में इस मुद्दे पर अब चुप नहीं बैठा जा सकता और इसके लिए व्यापक स्तर पर आवाज उठानी होगी।

इस दौरान Avimukteshwaranand Saraswati ने संत समाज पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज संत दो हिस्सों में बंट गए हैं, एक वे जो सत्ता के साथ खड़े हैं और दूसरे वे जो स्वतंत्र रूप से समाज के मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं, उन्होंने खुद को स्वतंत्र संतों की श्रेणी में बताते हुए कहा कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ बोलना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर संत समाज सरकार के सुर में सुर मिलाने लगेगा तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा, ऐसे में समाज को उन संतों से उम्मीद रखनी चाहिए जो बिना दबाव के सच के साथ खड़े होते हैं।

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