ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें साफ कहा गया है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अधिकार समाप्त नहीं होते और उसके हक उसके परिवार को मिलते हैं।
यह मामला कृषि विभाग के पूर्व वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी डॉ. राधाकृष्ण शर्मा से जुड़ा है, जिन्हें साल 2002 में लंबित आपराधिक मामले और ACR के आधार पर पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि उनके जूनियर को प्रमोशन दे दिया गया था।
बाद में जब डॉ. शर्मा उस आपराधिक मामले में बरी हो गए, तो उन्होंने अपनी पदोन्नति का दावा पेश किया, लेकिन विभाग ने इसे स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद उन्होंने 2008 में ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की।
जनवरी 2026 में डॉ. राधाकृष्ण शर्मा का निधन हो गया, लेकिन उनके बेटे ने मामले की पैरवी जारी रखी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति के अधिकार समाप्त नहीं होते।
कोर्ट ने पाया कि कृषि विभाग ने मनमाने तरीके से ACR का हवाला देकर पदोन्नति रोकी, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नति मानते हुए सेवा अवधि तक के सभी एरियर, वेतन, वरिष्ठता और अन्य लाभ उनके परिजनों को दिए जाएं।
हाईकोर्ट के इस फैसले को कर्मचारियों के अधिकारों के लिए एक अहम और नजीर के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन अधिकार कभी खत्म नहीं होते।

