आलीराजपुर। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन अलीराजपुर जिले के उदयगढ़ क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। यहां खारिया फलिया के आदिवासी परिवार आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। हर घर जल जैसी योजनाओं के दावों के बीच ग्रामीणों की हकीकत बेहद दर्दनाक है।
खारिया फलिया के करीब 20 आदिवासी परिवारों की जिंदगी एक नाले में बने लगभग 12 फीट गहरे गड्ढे के सहारे चल रही है। यही गड्ढा उनके लिए पानी का एकमात्र स्रोत बन गया है। सुबह होते ही महिलाएं सिर पर मटके और हाथों में बर्तन लेकर एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर इस नाले तक पहुंचती हैं। इसके बाद सीढ़ी के सहारे गहरे गड्ढे में उतरकर पानी निकाला जाता है। यह जोखिम भरा सिलसिला एक-दो दिन नहीं बल्कि वर्षों से जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके के हैंडपंप या तो सूख चुके हैं या फिर उनसे निकलने वाला पानी इतना खारा है कि पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में लोग नाले के गंदे पानी का इस्तेमाल पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कर रहे हैं। भीषण गर्मी में यह संकट और भी गंभीर हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार उनकी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2024 में मनरेगा के तहत एक सार्वजनिक कुएं की स्वीकृति भी मिली थी, लेकिन वह योजना भी अधूरी रह गई। आरोप है कि कुएं का निर्माण जरूरत वाली जगह पर नहीं कराया गया और अधूरा काम छोड़कर राशि निकाल ली गई। यदि समय पर सही स्थान पर कुआं बन जाता तो आज ग्रामीणों को इस तरह जान जोखिम में डालकर पानी नहीं भरना पड़ता।
स्थिति को और जटिल बनाता है दो पंचायतों के बीच का सीमा विवाद। ग्रामीण बताते हैं कि उनके मकान एक पंचायत की सीमा में आते हैं, जबकि खेती की जमीन दूसरी पंचायत में है। इसी वजह से जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही और समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले।
सीढ़ी के सहारे 12 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर पानी भरती महिलाओं की तस्वीरें सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उन दावों की हकीकत भी बयां करती हैं जो कागजों पर विकास दिखाते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन ग्रामीणों की प्यास कब बुझेगी, और क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?

