सोमवती अमावस्या पर नर्मदापुरम में उमड़ा आस्था का सैलाब, महासंयोग में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

नर्मदापुरम। ज्येष्ठ अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या पर नर्मदापुरम में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सोमवार को नर्मदा नदी के घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पंचांग के अनुसार इस बार अमावस्या, सूर्य संक्रांति और अधिकमास का दुर्लभ महासंयोग बना है, जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जा रहा है। इसी विशेष अवसर का लाभ लेने के लिए सुबह तड़के पांच बजे से ही श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाना शुरू कर दिया।

नर्मदापुरम में मेले जैसा माहौल रविवार शाम से ही बनने लगा था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सेठानी घाट पहुंचने लगे थे। रातभर घाटों पर भजन-कीर्तन और जागरण का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की आराधना की और पूरी श्रद्धा के साथ इस पावन पर्व का इंतजार किया।

सोमवार सुबह सूर्योदय के साथ ही मुख्य स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। सेठानी घाट के अलावा विवेकानंद घाट, गोंदरी घाट और पर्यटन घाट पर भी भारी भीड़ देखने को मिली। हालात ऐसे थे कि कई स्थानों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

इस विशेष अवसर पर सिर्फ नर्मदापुरम ही नहीं, बल्कि प्रदेश और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे। भोपाल, विदिशा, बैतूल, छिंदवाड़ा सहित महाराष्ट्र के नागपुर से बड़ी संख्या में लोग नर्मदा स्नान के लिए यहां पहुंचे और पुण्य लाभ अर्जित किया।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस महासंयोग में नर्मदा स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, संकल्प लिया और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान भी किया।

भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट नजर आया। घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस और होमगार्ड के जवानों की बड़ी टीम तैनात की गई, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी गई। सेठानी घाट पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों से सतर्क और सुरक्षित रहने की अपील की जाती रही।

सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने नर्मदापुरम को एक बार फिर आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में बदल दिया, जहां श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला।

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