भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के लाखों बच्चों को अब तक स्कूल यूनिफॉर्म नहीं मिलने का मुद्दा सियासी रंग पकड़ता जा रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि आधा शैक्षणिक सत्र बीतने के बावजूद करीब 55 लाख बच्चों को गणवेश उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीब परिवारों की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई को मजाक बनाकर रख दिया है और अब यूनिफॉर्म वितरण को भी मुनाफे का जरिया बना दिया गया है।
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पहले स्कूल यूनिफॉर्म तैयार करने का काम महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जाता था, जिससे महिलाओं को रोजगार भी मिलता था। लेकिन अब यह काम निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार नारी सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं से रोजगार छीनकर बड़े ठेकेदारों और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर हर क्षेत्र के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा, रोजगार और अवसरों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उनका कहना है कि यह सरकार आम जनता के हितों की बजाय निजी कंपनियों और बड़े उद्योगपतियों के हितों की रक्षा करने में जुटी हुई है।
सिंघार ने कहा कि जब शैक्षणिक सत्र का बड़ा हिस्सा बीत चुका है, तब भी गरीब बच्चों को यूनिफॉर्म का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं की आजीविका पर भी असर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों की जरूरतें नहीं, बल्कि ठेकेदारों का मुनाफा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में ऐसी स्थिति बन गई है, जहां गरीब बच्चे इंतजार करने को मजबूर हैं, महिलाएं बेरोजगारी झेल रही हैं, लेकिन ठेकेदारों का लाभ किसी भी कीमत पर नहीं रुकना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार का असली मंत्र बन गया है, “जनता पर अत्याचार और उद्योगपतियों-ठेकेदारों पर उपकार।”
नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद प्रदेश में स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म वितरण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। अब सबकी निगाहें सरकार के जवाब और यूनिफॉर्म वितरण की वास्तविक स्थिति पर टिकी हुई हैं।

