भोपाल। मध्यप्रदेश के नीमच जिले की जावद विधानसभा के ग्राम बंगरेड में एक कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया, जब बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लोकार्पण के बाद गांव के लोगों ने विकास कार्यों और सड़क निर्माण के मुद्दे को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण विधायक के पास पहुंचे और गांव की समस्याओं को लेकर सवाल उठाने लगे। ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में कई जरूरी विकास कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं, जबकि लंबे समय से उन्हें आश्वासन दिया जाता रहा है। इसी बात को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और मौके पर नारेबाजी शुरू हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लाखों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए आज भी बेहतर सड़क उपलब्ध नहीं है। लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। इसी वजह से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विरोध के दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया जब कुछ ग्रामीणों और सुरक्षा कर्मियों के बीच बहस की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा। इस दौरान काफी देर तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही और लोगों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आवाज उठाई।
घटना से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में विधायक अपने समर्थकों और सुरक्षा कर्मियों के साथ भीड़ के बीच से निकलते दिखाई दे रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग अपनी नाराजगी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उन समस्याओं के खिलाफ है जिनका समाधान वर्षों से नहीं हो पाया है। उनका साफ कहना है कि जब तक सड़क निर्माण और अन्य जरूरी विकास कार्य पूरे नहीं होंगे, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
वहीं इस घटना के बाद स्थानीय राजनीति भी गर्मा गई है। मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

