इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के ललितपुर निवासी मेडिकल स्टूडेंट अंशु ने रेंटल कार कंपनी के संचालकों पर अपहरण, बंधक बनाकर मारपीट करने और 75 हजार रुपये छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 22 जून को हुई कथित घटना के कई दिन बाद भी पीड़ित न्याय की उम्मीद में थानों के चक्कर काट रहा है।
पीड़ित अंशु के मुताबिक वह एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर आया था। यहां उसने ‘गो विथ कार’ नाम की कंपनी से किराए पर कार ली थी। इसी दौरान कार पीछे से क्षतिग्रस्त हो गई। अंशु का आरोप है कि हादसे के बाद कंपनी से जुड़े शुभम यादव और वंश यादव बातचीत के बहाने उसे अपने साथ ले गए और जबरन बेटमा स्थित होटल 777 में ले जाकर बंधक बना लिया।
अंशु का कहना है कि वहां उस पर कार के नुकसान की भरपाई के नाम पर दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसके पास मौजूद करीब 75 हजार रुपये भी छीन लिए गए।
पीड़ित के पिता का आरोप है कि पहले कार के नुकसान की भरपाई के लिए 95 हजार रुपये मांगे गए थे। बाद में एक परिचित की मध्यस्थता से 40 हजार रुपये में समझौता हुआ। परिवार का कहना है कि 40 हजार रुपये लेने के बावजूद आरोपियों ने अंशु के पास मौजूद नकदी भी अपने कब्जे में ले ली।
अंशु ने बताया कि वह पहले इंदौर में रहकर पढ़ाई कर चुका है और फिलहाल मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। घटना के बाद से वह लगातार सहयोगितागंज, आजाद नगर और भंवरकुआं थाने के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसके अनुसार अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही किसी आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
पीड़ित ने शुभम यादव, वंश यादव और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर रखने, मारपीट और रुपये छीनने के आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब सामने नहीं आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि लगाए गए आरोप सही हैं, तो आखिर कई दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

