भोपाल/जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षकों की भारी कमी और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। सभी संबंधित पक्षों को 17 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि प्रदेश में शिक्षकों के कुल 2 लाख 89 हजार स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 1 लाख 15 हजार 678 पद अब भी खाली पड़े हैं। यानी करीब 40 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त हैं, जिसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ रहा है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके अलावा करीब 5 हजार स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। वहीं 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है और लगभग 59 हजार स्कूल आज भी कंप्यूटर जैसी बुनियादी डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव का असर छात्रों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 22 लाख से अधिक घट गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि शिक्षकों की भर्ती, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी, जिस पर अब प्रदेशभर की नजरें टिकी हैं।

