अयोध्या.राम मंदिर चढ़ावे और चंदा संग्रह को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण और विश्व हिंदू परिषद के नेता गोपाल के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पाटिल ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी को शिकायत सौंपकर दोनों समेत तीन लोगों के खिलाफ जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा संग्रह के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और चंदे की रकम का दुरुपयोग कर बेहिसाब संपत्ति बनाई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास इस संबंध में दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं, जिन्हें एसआईटी को सौंप दिया गया है।
दीपक पाटिल ने अपने पत्र में भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण, विश्व हिंदू परिषद के नेता गोपाल और उनके सहयोगी सतीश नौबड़े के नाम का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि चंदा संग्रह अभियान के बाद इन लोगों की संपत्तियों में असामान्य बढ़ोतरी हुई है और कथित बेनामी संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए।
इधर इसी विवाद के बीच एक और बड़ा आरोप सामने आया है। हरिशंकर सफरीवाला ने चंपत राय पर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि वर्ष 1987 में पंजीकृत राम निवास धाम मंदिर को मंदिर समिति की जानकारी और सहमति के बिना पुजारी के माध्यम से अपने नियंत्रण में लिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मंदिर से जुड़े एक सौदे में करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें 60 लाख रुपये अग्रिम देकर कब्जा हासिल किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की मंदिर संपत्ति और लगभग 250 बीघा जमीन पर जबरन कब्जा किया गया। इसके अलावा मंदिर में मौजूद दान की राशि, मूर्तियां, सिंहासन, पलंग और अन्य कीमती सामान भी अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया गया है।
फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। मामले की जांच की मांग की गई है और संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

