आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले से प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। भाबरा विकासखंड की ग्राम पंचायत रिंगोल में आयोजित रात्रि चौपाल में जिला कलेक्टर नीतू माथुर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और बेहद भावुक अंदाज में कहा कि वह यहां कलेक्टर बनकर नहीं, बल्कि गांव की बहन बनकर उनकी समस्याएं सुनने आई हैं।
इस रात्रि चौपाल की सबसे खास बात यह रही कि कलेक्टर नीतू माथुर, जिला पंचायत की सीईओ संघमित्रा गौतम और जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग सरकारी वाहनों से नहीं, बल्कि एक ही पूल वाहन में सवार होकर रिंगोल गांव पहुंचे। प्रशासन की इस पहल की ग्रामीणों ने भी सराहना की।
चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, खाद, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन्म प्रमाण पत्र, नामांतरण, बंटवारा, जॉब कार्ड और अतिक्रमण जैसी कई समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कलेक्टर ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने गांव के जर्जर स्कूल भवन का मुद्दा भी उठाया, जिस पर कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को मौके पर जांच करने और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर नीतू माथुर ने औपचारिकता से हटकर चौपाल में मौजूद बुजुर्गों के बीच पहुंचकर उनका हालचाल जाना। उन्होंने जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश दिए। इस दौरान वय वंदना योजना के तहत तीन बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए, जबकि तीन महिला स्व-सहायता समूहों को सीसीएल लोन के चेक भी सौंपे गए।
रात्रि चौपाल में विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों तक पहुंचाई। कलेक्टर ने आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने, गर्भवती महिलाओं को समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश भी दिया। प्रशासन की यह पहल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

