इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार ने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से लंबित और निष्क्रिय पड़े निवेश प्रोजेक्ट्स पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार अब उन कंपनियों से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर रही है, जिन्हें बड़े निवेश और रोजगार के वादों के आधार पर जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन तय समय में परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकीं।
जानकारी के अनुसार, पिछले कई वर्षों में विभिन्न कंपनियों और निवेश समूहों को आवंटित करीब 419 एकड़ औद्योगिक भूमि की समीक्षा की जा रही है। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम का कहना है कि जिन परियोजनाओं पर लंबे समय से काम शुरू नहीं हुआ है, उनके मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इन्हीं में एक नाम पतंजलि समूह का भी है। कंपनी को फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी परियोजना के लिए जमीन आवंटित की गई थी। दावा किया गया था कि इससे बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हालांकि, निर्धारित समय के बाद भी परियोजना शुरू नहीं होने पर संबंधित विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी किया है।
वहीं, रिलायंस समूह से जुड़ी एक प्रस्तावित परियोजना को लेकर भी सरकार समीक्षा कर रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत बड़े निवेश और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव था, लेकिन वर्षों बाद भी परियोजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी। अब सरकार ऐसे मामलों में भूमि उपयोग की स्थिति का आकलन कर रही है।
इसके अलावा, जापानी और दक्षिण-पूर्व एशियाई निवेशकों के लिए आरक्षित की गई करीब 178 एकड़ जमीन भी चर्चा में है। निवेश की संभावनाओं को देखते हुए यह भूमि सुरक्षित रखी गई थी, लेकिन अब तक कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में सरकार इस जमीन को नए निवेश प्रस्तावों के लिए उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है।
सरकार का कहना है कि आगामी निवेश सम्मेलनों को देखते हुए पूरे प्रदेश में निष्क्रिय औद्योगिक भूखंडों की समीक्षा की जा रही है। उद्देश्य यह है कि जो जमीन वर्षों से खाली पड़ी है, उसका उपयोग नए और गंभीर निवेशकों के लिए किया जाए, ताकि प्रदेश में रोजगार और औद्योगिक विकास को गति मिल सके।
अब देखने वाली बात होगी कि इन कंपनियों की ओर से नोटिस के जवाब में क्या पक्ष रखा जाता है और सरकार की यह कार्रवाई प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को किस तरह प्रभावित करती है।

