भोपाल। मध्यप्रदेश में आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा अब नई रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। पार्टी संगठन ने मंत्री दर्जा प्राप्त नेताओं और निगम-मंडलों में नियुक्त पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की तैयारी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक अब जिन नेताओं को सरकारी पद और जिम्मेदारियां दी गई हैं, उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को जिताने की जवाबदारी भी निभानी होगी।
बताया जा रहा है कि नगरीय निकाय चुनाव के साथ-साथ त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भी भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों की जीत सुनिश्चित करने का दबाव इन नेताओं पर रहेगा। इसके लिए जल्द ही संगठन की बड़ी बैठक होने वाली है, जिसमें क्षेत्रवार जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
जानकारी के अनुसार अब तक करीब 60 राजनीतिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं, जबकि लगभग 30 और नियुक्तियां कतार में हैं। इनमें विकास प्राधिकरण, निगम, मंडल और अन्य संस्थानों के पद शामिल हैं। हालांकि आयोग और बोर्ड के पदाधिकारी इस जिम्मेदारी से बाहर रहेंगे।
भाजपा का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिम्मेदारी देने के लिए ही ऐसी नियुक्तियां की जाती हैं, ताकि संगठन के प्रति उनका समर्पण और मजबूत हो। भाजपा प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा ने कहा कि जिन नेताओं को जिम्मेदारी मिली है, उन्हें आगे और बड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं।
वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने आयातित नेताओं से पार्टी भर ली है और अब उनसे चुनाव जिताने का वादा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ये नेता खुद मजबूत होते तो विधानसभा टिकट मांग रहे होते।
अब देखना होगा कि भाजपा की यह नई रणनीति आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों में कितना असर दिखाती है।

