दिल्ली में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की खबर के बाद मध्य प्रदेश में देर रात राजनीतिक माहौल गरमा गया। उज्जैन, विदिशा, खंडवा और मंडला जिले के नैनपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
उज्जैन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में कार्यकर्ता टॉवर चौक पर एकत्रित हुए। यहां केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और विरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के घायल होने की खबर का भी जिक्र किया गया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों को लेकर उठ रही आवाजों को दबाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पुतले भी जलाए गए।
वहीं, विदिशा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित रघुवंशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विवेकानंद चौराहे पर देर रात तक धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी की रिहाई की मांग की।
खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए कहा कि यदि उनके नेताओं को हिरासत में लिया जा सकता है, तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मंडला जिले के नैनपुर में भी कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। थाना परिसर के बाहर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए।
दिल्ली की घटना के बाद मध्य प्रदेश के कई जिलों में हुए इन प्रदर्शनों ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

