जबलपुर। मध्य प्रदेश में खराब सड़कों, गड्ढों और लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सड़क निर्माण और रखरखाव में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाए जा सकते हैं और मुंबई में समुद्र के नीचे मेट्रो रूट तैयार किया जा सकता है, तो फिर टिकाऊ और सुरक्षित सड़कें क्यों नहीं बनाई जा सकतीं?”
यह जनहित याचिका इंदौर निवासी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर की गई है। याचिका में प्रदेश की सड़कों की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक अनदेखी से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि खराब सड़कों और गड्ढों के कारण प्रदेश में लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे लोगों की जान जा रही है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सड़क हादसों के मामलों में मध्य प्रदेश देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। सड़कों का घटिया निर्माण, समय पर मरम्मत न होना और रखरखाव में लापरवाही को इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बताया गया है।
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है और सड़क सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। माना जा रहा है कि उस दिन सरकार को सड़क निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी।
हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद एक बार फिर प्रदेश की सड़क व्यवस्था और उससे जुड़े जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

