संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु वेश में किए गए एक प्रदर्शन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे की गूंज अब मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ तक पहुंच गई है, जहां संत समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया।
टीकमगढ़ के धजरई हनुमान मंदिर में निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज ने साधु-संतों के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजनीतिक संदेश देने के लिए साधु वेश का उपयोग उचित नहीं है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सांसद पप्पू यादव की संसद सदस्यता समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई।
दरअसल, संसद परिसर में विपक्ष के कुछ सांसदों ने राम मंदिर चंदे को लेकर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में पप्पू यादव पुजारी की भूमिका में दिखाई दिए। उनके सामने एक दान पात्र रखा गया था और अन्य सांसद श्रद्धालुओं की भूमिका निभाते हुए उसमें पैसे डालते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान मंचन में यह भी दिखाया गया कि दान पात्र में आए पैसे पुजारी की भूमिका निभा रहे सांसद अपनी जेब में रख रहे हैं। इसके बाद एक अन्य सांसद ने भी प्रतीकात्मक रूप से इस पर आपत्ति जताई। पूरा प्रदर्शन नुक्कड़ नाटक की शैली में प्रस्तुत किया गया था।
इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ अब धार्मिक संगठनों की ओर से भी विरोध सामने आने लगा है। फिलहाल इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

