भोपाल: मध्य प्रदेश में दतिया उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी संगठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में अब मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदर्शन और संगठन की स्थिति को लेकर केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर मंथन का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच प्रदेश के कई बड़े नेता दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।
दिल्ली में लगातार हो रही इन मुलाकातों को मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी पार्टी पदाधिकारियों और केंद्रीय नेतृत्व के साथ चर्चा की है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ वीडी शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गृह मंत्री अमित शाह के साथ लंबी चर्चा की, जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रभारी नितिन नवीन के बीच भी बैठक हुई।
इसके अलावा 2023 विधानसभा चुनाव के सह प्रभारी रहे केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से चुनाव के दौरान बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले रजनीश अग्रवाल ने भी मुलाकात की है। इन बैठकों के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी के संगठनात्मक प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
दरअसल, बीजेपी के लिए दतिया की हार इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले विजयपुर उपचुनाव में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं बुधनी में जीत का अंतर करीब एक लाख से घटकर लगभग दस हजार के आसपास पहुंच गया था। अमरवाड़ा में भी बीजेपी को कड़े मुकाबले के बाद जीत हासिल हुई थी। ऐसे में लगातार चुनावों के बदलते नतीजों ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान मध्य प्रदेश संगठन की कार्यप्रणाली की ओर खींचा है।
अब दिल्ली में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चुनाव दर चुनाव बीजेपी के प्रदर्शन में कमी क्यों आ रही है और संगठन के स्तर पर कहां चूक हो रही है। क्या इसकी वजह बूथ स्तर का कमजोर प्रबंधन है, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी है या फिर जनता के बीच संगठन की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही है।
इन्हीं सवालों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश बीजेपी से फीडबैक ले रहा है। राजनीतिक गलियारों में इन बैठकों को संगठन में संभावित बदलाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी बड़े फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दिल्ली में हुई इन लगातार बैठकों ने मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
अब देखना होगा कि दतिया की हार के बाद शुरू हुआ यह मंथन सिर्फ समीक्षा तक सीमित रहता है या फिर आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

