भोपाल/उज्जैन। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर उज्जैन को एक बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कौशल एवं तकनीकी विकास योजना के तहत उज्जैन में ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। इस केंद्र का उद्देश्य पारंपरिक हथकरघा कला को बढ़ावा देना, स्थानीय बुनकरों को रोजगार देना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब उज्जैन में दोबारा कॉटन और दूसरे कपड़ों के निर्माण का काम शुरू होगा। इस केंद्र में महिलाओं को हथकरघा और बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे घर पर ही चरखा और लूम चलाकर काम कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रशिक्षण और रोजगार के जरिए महिलाओं को हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये तक की आय का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही लूम के संचालन से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आने वाले समय में कॉटन के साथ-साथ रेशम उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उज्जैन के इंदौर रोड स्थित बाबा साहब नातू सामुदायिक भवन में शुरू किए गए इस सेंटर का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण भी किया। उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं से बातचीत कर हथकरघा उद्योग की जानकारी ली और खुद चरखा चलाकर महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेंटर के प्रथम तल पर लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को हथकरघा का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा सके। वहीं भूतल पर तैयार किए जाने वाले उत्पादों की बिक्री के लिए शो-रूम बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की खादी और हथकरघा परंपरा को दुनिया तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में खादी ग्रामोद्योग के कारोबार और मुनाफे में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने धार में बन रहे पीएम मित्रा पार्क का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक पार्क बनने जा रहा है, जिससे प्रदेश में टेक्सटाइल और रोजगार के क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
इस मौके पर सांसद अनिल फिरोजिया ने भी हैंडलूम सेंटर को उज्जैन के लिए बड़ी सौगात बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से खासतौर पर महिलाओं को स्वावलंबी बनने का अवसर मिलेगा।
हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में महिलाओं को करीब छह महीने का बुनियादी हथकरघा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें हथकरघा संचालन, बुनाई और कपड़ा निर्माण की अलग-अलग तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा।
वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित मृगनयनी ने देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के स्वामित्व वाला जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनने की उपलब्धि हासिल की है। इससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंच बनाने का नया मंच मिलेगा।
उज्जैन में शुरू हुआ यह हैंडलूम सेंटर अब सिर्फ प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और प्रदेश की पारंपरिक कला को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

