तीन दिन, 120 किलोमीटर पैदल कांवड़ और अटूट आस्था, 15 साल के कनक ने पेश की श्रद्धा की मिसाल

खंडवा। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के प्रति आस्था और भक्ति की एक प्रेरणादायक तस्वीर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में देखने को मिली। खरगोन से करीब 120 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा कर 30 महिला, पुरुष और बच्चों का जत्था तीन दिन में ओंकारेश्वर पहुंचा। इस यात्रा में सबसे ज्यादा चर्चा 15 साल के कनक की रही, जिसने इतनी कम उम्र में करीब 120 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

श्रद्धालु अलका रघुवंशी के मुताबिक, कांवड़ यात्रियों के दल ने हर दिन करीब 30 से 35 किलोमीटर का सफर तय किया और तीन दिनों में ओंकारेश्वर पहुंच गया। रास्ते में थकान और कई तरह की मुश्किलें आईं, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

पूरा दल लगातार बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ता रहा। यात्रियों का कहना है कि भगवान शिव की कृपा से पूरी यात्रा सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरी हुई।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु अपने साथ भोजन की व्यवस्था लेकर चल रहे थे। रास्ते में जहां भी उचित जगह मिलती, वहीं रुककर भोजन किया जाता और रात में विश्राम किया जाता था।

तीन दिन की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद जब श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे तो उनके चेहरे पर थकान के साथ-साथ भक्ति और खुशी भी साफ दिखाई दे रही थी। श्रद्धालुओं ने भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और मां नर्मदा का पवित्र जल अर्पित कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया।

इसके साथ ही कांवड़ यात्रा का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

इस पूरी यात्रा में कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले 15 वर्षीय कनक का उत्साह सबसे खास रहा। इतनी कम उम्र में करीब 120 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पूरी करना अपने आप में बड़ी बात है।

कनक पूरे रास्ते श्रद्धालुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा और उसकी आस्था और उत्साह पूरे दल के लिए प्रेरणा बना रहा।

सावन के महीने में ओंकारेश्वर पहुंची इस कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर दिखा दिया कि जब मन में आस्था और भगवान शिव के प्रति विश्वास हो, तो बड़ी से बड़ी दूरी और मुश्किल रास्ते भी छोटे लगने लगते हैं।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ पूरी हुई यह यात्रा सिर्फ 120 किलोमीटर का सफर नहीं थी, बल्कि भक्ति, संकल्प और अटूट आस्था की ऐसी कहानी थी, जिसमें 15 साल के कनक ने भी अपनी श्रद्धा से एक खास मिसाल कायम कर दी।

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