भोपाल/जबलपुर। ‘बोल कांवड़िया, बोल बम…’ के जयकारों से जबलपुर की सड़कों पर भक्तिमय माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कांवड़िए झूमते नजर आए और चारों तरफ भगवान भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। सावन के पवित्र सोमवार पर मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में रांझी क्षेत्र से संस्कार कांवड़ यात्रा निकाली गई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए।
सीएम ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल, बजाया डमरू
कांवड़ यात्रा में शामिल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांवड़ियों का फूल बरसाकर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने खुद कांवड़ उठाई और उत्साह के साथ डमरू भी बजाया। मुख्यमंत्री दादा गुरु के साथ कांवड़ यात्रा में पैदल चलते नजर आए। उनके साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
जबलपुर में निकली इस विशाल कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। हाथों में कांवड़ और जुबां पर ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ श्रद्धालु मां नर्मदा का जल लेकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने के लिए आगे बढ़ते रहे।
कांवड़ियों के सैलाब को देखकर सीएम भी हुए अभिभूत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सावन का यह पवित्र सोमवार भगवान भोलेनाथ की भक्ति का दिन है और मां नर्मदा का आशीर्वाद सभी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कांवड़िए मां नर्मदा का जल लेकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने के लिए निकले हैं और जिस तरफ नजर जा रही है, वहां तक कांवड़ियों का सैलाब दिखाई दे रहा है।
सीएम ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे कांवड़िए समुद्र की लहरों की तरह आगे बढ़ रहे हों। हर श्रद्धालु अपनी साधना, भक्ति और संकल्प के साथ इस यात्रा में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा भी अपने भक्तों के साथ जल के रूप में इस यात्रा में शामिल हैं।
धर्म और सनातन संस्कृति को लेकर सरकार का बड़ा दावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने कई कांवड़ यात्राएं देखी हैं, लेकिन इतनी बड़ी कांवड़ यात्रा पहली बार देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सावन भगवान भोलेनाथ की भक्ति का महीना है और दादा गुरु के नेतृत्व में श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ यात्रा में शामिल हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने और सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार एक तरफ कांवड़ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ धार्मिक स्थलों को भी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की जड़ों में सनातन संस्कृति है, जो आत्म अनुशासन, प्रगति और उल्लास का मार्ग दिखाती है और जीवन की चुनौतियों से संघर्ष करना सिखाती है।
‘जीवन का मर्म सिर्फ खाना-पीना नहीं’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस कांवड़ यात्रा में शामिल संत समाज एक बड़ा संदेश दे रहा है कि जीवन का उद्देश्य सिर्फ खाना-पीना नहीं, बल्कि पवित्र मार्ग पर चलकर परमात्मा तक पहुंचना भी है।
उन्होंने दादा गुरु का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया है कि जल के आधार पर भी जीवन को आगे बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दादा गुरु मां नर्मदा के जल के भरोसे अपना जीवन चला रहे हैं और उनका आशीर्वाद सभी को मिलता रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा के कण-कण में शंकर का वास माना जाता है और ऐसी आस्था से जुड़ी कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि साधना, संकल्प और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने संस्कार कांवड़ यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

