एमपी में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 लागू, फाइल अटकाई तो अफसरों पर लगेगा जुर्माना

भोपाल। मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने की तैयारी कर रहे निवेशकों और कारोबारियों के लिए मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में अब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026’ लागू हो गया है और इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

सरकार का दावा है कि इस नए कानून से उद्योगों की स्थापना में आने वाली लालफीताशाही कम होगी और सरकारी दफ्तरों में फाइलें अटकाने की समस्या पर भी लगाम लगेगी।

सबसे खास बात यह है कि अगर किसी अधिकारी ने तय समय-सीमा के भीतर उद्योग से जुड़ी फाइल का निपटारा नहीं किया, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकेगा।

यानी अब किसी अधिकारी की लापरवाही के कारण फाइल लंबे समय तक टेबल पर पड़ी नहीं रहेगी। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर फाइल ऑटोमैटिक तरीके से यानी डीम्ड अप्रूवल व्यवस्था के तहत अगली अधिकृत अथॉरिटी के पास ट्रांसफर हो जाएगी।

इस व्यवस्था का मकसद उद्योगपतियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना और मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करना है।

नए अधिनियम के तहत उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी 76 तरह की मंजूरियों को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब बिजली कनेक्शन, श्रम और पर्यावरण जैसी अलग-अलग मंजूरियों के लिए उद्यमियों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों में जाने की जरूरत नहीं होगी।

इन तमाम प्रक्रियाओं को एक ही सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए आसान बनाने की व्यवस्था की गई है।

सरकार ने इस कानून को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी MPIDC को नोडल एजेंसी के तौर पर दी है।

सरकार का मानना है कि मंजूरियों की प्रक्रिया आसान होने और अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर होगा। इससे नए उद्योग स्थापित होने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

अब देखने वाली बात होगी कि कागज पर लागू हुआ यह नया कानून जमीन पर कारोबारियों और निवेशकों के लिए कितना आसान साबित होता है और फाइलों की रफ्तार वास्तव में कितनी तेज होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *