डबरा (ग्वालियर)। मध्य प्रदेश के डबरा में बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। जर्जर दो मंजिला मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई और कमरे के अंदर सो रहा पूरा परिवार मलबे में दब गया।
हादसा डबरा शहर के जंगीपुरा इलाके में हुआ। बताया जा रहा है कि छत गिरने के वक्त कमरे में सात लोग मौजूद थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोगों ने कड़ी मशक्कत कर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया।
इस हादसे में 2 साल के मासूम आदित्य और उसकी मां सीमा की मौत हो गई। वहीं पिता और चार बेटियां घायल हो गईं। घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत को देखते हुए पिता और दो बेटियों को ग्वालियर रेफर कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि चार बेटियों के बाद परिवार में बेटे का जन्म हुआ था। मासूम आदित्य अपनी मां के साथ सो रहा था, तभी अचानक छत का मलबा दोनों के ऊपर जा गिरा और दोनों की जान चली गई।
हादसे के बाद परिवार की ओर से अस्पताल में इलाज को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि घायलों को अस्पताल लेकर पहुंचने के बाद उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिल पाया और ड्यूटी डॉक्टर की ओर से प्राइवेट अस्पताल ले जाने की बात कही गई। परिवार का आरोप है कि इलाज में हुई कथित देरी के कारण मां और बेटे की मौत हो गई।
हालांकि, इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटना के बाद प्रशासन भी मौके पर पहुंचा। डबरा की एसडीएम नवकिरण कौर के मुताबिक मकान जर्जर हालत में था और बारिश के कारण यह हादसा हुआ। प्रशासन अब इलाके में मौजूद दूसरे जर्जर मकानों को भी चिन्हित करने की बात कह रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
वहीं इलाज में अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जांच कर कार्रवाई का भरोसा भी प्रशासन की ओर से दिया गया है।
एक तरफ बारिश के बीच जर्जर मकानों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ इस हादसे ने प्रशासन की निगरानी और अस्पतालों में मिलने वाली आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
डबरा की इस दर्दनाक घटना में एक मां और उसके मासूम बेटे की जिंदगी खत्म हो गई, जबकि पूरा परिवार अस्पताल पहुंच गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जर्जर मकान को लेकर पहले से कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर इलाज में लापरवाही के आरोप सही हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

