इंदौर। इंदौर के देवी अहिल्या बाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। विमानों के सुरक्षित और सुगम संचालन के लिए यहां नया और अत्याधुनिक रडार सिस्टम लगाए जाने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI को 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
इंदौर एयरपोर्ट पर आधुनिक रडार की जरूरत का मुद्दा सांसद शंकर लालवानी की ओर से उठाया गया था, जिसके बाद इस दिशा में तेजी से काम शुरू हुआ है। बताया जा रहा है कि मौजूदा रडार सिस्टम काफी पुराना हो चुका है और इसकी वजह से एयर ट्रैफिक संचालन में तकनीकी चुनौतियां सामने आती रही हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि फिलहाल इंदौर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल काफी हद तक नागपुर के रडार सिस्टम पर निर्भर रहता है। नया रडार सिस्टम स्थापित होने के बाद इंदौर की यह निर्भरता काफी हद तक खत्म हो सकती है और एयरपोर्ट अपने एयर ट्रैफिक संचालन के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनेगा।
आधुनिक तकनीक से लैस यह रडार खराब मौसम, कोहरे और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी विमानों की निगरानी और सुरक्षित संचालन में मददगार साबित होगा। इससे विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैठक में सिर्फ रडार सिस्टम ही नहीं, बल्कि इंदौर एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। रनवे बड़ा होने से भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों की आवाजाही के रास्ते खुल सकते हैं।
वहीं, इंदौर से हाल के दिनों में कई प्रमुख शहरों की उड़ानें बंद या कम होने से यात्रियों को हो रही परेशानी का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एयरलाइंस कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ जल्द बैठक करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बंद हुई उड़ानों को दोबारा शुरू कराने के साथ नए हवाई मार्ग जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जा सके।
यानी आने वाले समय में इंदौर एयरपोर्ट पर एक तरफ आधुनिक रडार सिस्टम की सुविधा बढ़ेगी, तो दूसरी तरफ रनवे विस्तार और नई उड़ानों के जरिए एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने की कोशिश भी तेज होगी।

