धार में वराह मार्च पर प्रशासन और सनातनी प्रहरी आमने-सामने, अनुमति नहीं या सिर्फ सूचना का मामला?

धार। मध्य प्रदेश के धार में 15 सितंबर को प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर अब प्रशासन और सनातनी प्रहरी संगठन के बीच तकरार की स्थिति बनती नजर आ रही है। मामला उस वक्त गरमा गया जब धार एसडीएम की ओर से वाहन रैली को अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई। लेकिन संगठन का कहना है कि उन्होंने रैली के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी ही नहीं थी, बल्कि सिर्फ आयोजन की सूचना प्रशासन को दी थी।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, आगामी त्योहारों और कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए वाहन रैली को अनुमति देने से इनकार किया गया है। प्रशासन का तर्क है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजन से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए ऐसे आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है।

वहीं दूसरी तरफ सनातनी प्रहरी संगठन ने प्रशासन के रुख पर अलग ही बात रखी है। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि वराह मार्च कोई राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक जन-जागृति अभियान है। उनका कहना है कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने जा रहा है और इसके लिए प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी। यानी संगठन के मुताबिक मामला अनुमति का नहीं, बल्कि प्रशासन को आयोजन से अवगत कराने का था।

अब असली विवाद यही है कि क्या वराह मार्च के लिए बाकायदा अनुमति जरूरी थी या संगठन की ओर से दी गई सूचना पर्याप्त थी? एक तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ संगठन इसे अपने धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में देख रहा है।

15 सितंबर को प्रस्तावित इस मार्च को लेकर अब प्रशासन और संगठन के बीच आगे क्या सहमति बनती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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