इंदौर। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर के बाहर लगे डिस्प्ले बोर्ड पर अचानक उर्दू की कुछ लाइनें चलने लगीं और देखते ही देखते इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान मंदिर के बाहर लगे स्क्रीन पर धार्मिक संदेशों की जगह उर्दू की आयतें कैसे फ्लैश हो गईं?
बताया जा रहा है कि डिस्प्ले बोर्ड पर आमतौर पर ‘राधे-राधे’, ‘नंद के आनंद भयो’ और ‘जय कन्हैया लाल की’ जैसे संदेश चलाए जा रहे थे। लेकिन कुछ देर के लिए स्क्रीन पर उर्दू में लिखी लाइनें दिखाई दीं। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
मामले को लेकर पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे किसी साजिश के बजाय डिस्प्ले बोर्ड संचालक की लापरवाही बताया है। ADCP राजेश दंडोतिया के मुताबिक, स्क्रीन पर दिखाई गई उर्दू की लाइनें कुरान की कुछ आयतें थीं, जिन्हें अलग-अलग धार्मिक आयोजनों के लिए एक पेन ड्राइव में रखा गया था। पुलिस के अनुसार, डिस्प्ले बोर्ड लगाने वाले व्यक्ति से गलती से यह सामग्री कुछ समय के लिए स्क्रीन पर फ्लैश हो गई और गलती का पता चलते ही उसे तुरंत हटा दिया गया।
पुलिस का यह भी कहना है कि स्क्रीन पर कोई धर्म विरोधी नारा या आपत्तिजनक स्लोगन नहीं चलाया गया था। हालांकि, जन्माष्टमी जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर के बाहर ऐसा कंटेंट अचानक स्क्रीन पर आ जाना कई सवाल जरूर खड़े करता है।
हिंदू संगठनों ने भी मामले पर आपत्ति जताते हुए पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की लापरवाही को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि डिस्प्ले बोर्ड किसने लगवाया था, इसे संचालित कौन कर रहा था और अलग-अलग धार्मिक आयोजनों की सामग्री पेन ड्राइव में किस तरह सेव की गई थी। शुरुआती जांच में मामला लापरवाही का नजर आ रहा है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जन्माष्टमी के दिन मंदिर के बाहर लगे डिस्प्ले बोर्ड पर उर्दू की आयतें आखिर गलती से चलीं या इसके पीछे कोई और वजह थी?

