जबलपुर (बालाघाट)। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक गर्भवती महिला और उसके पति ने पुलिसकर्मियों पर थाने में कपड़े उतरवाकर बेल्ट और डंडों से बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद एसपी आदित्य मिश्रा ने किरनापुर थाने के चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
ग्राम टिमकीटोला निवासी सावत्रीबाई और उनके पति कैलाश चौधरी का आरोप है कि 2 सितंबर को पोस्ट ऑफिस में हुई चोरी के मामले में पुलिस उन्हें संदेह के आधार पर घर से उठाकर थाने ले गई थी। दंपती का दावा है कि थाने में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और दोनों को अलग-अलग कमरों में ले जाकर बेल्ट और डंडों से मारपीट की गई।
सावत्रीबाई ने आरोप लगाया कि वह करीब दो महीने की गर्भवती हैं। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की और धमकाकर चोरी का अपराध कबूल करने का दबाव बनाया। महिला का यह भी कहना है कि मारपीट के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और जमानत पर बाहर आने के बाद उनका इलाज चल रहा है।
अब परिवार को महिला की सेहत के साथ-साथ उसके गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर घर से 20 हजार रुपये नकद, जेवर और बाइक की चाबी ले जाने का आरोप भी लगाया है।
घटना के बाद पीड़ित दंपती सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। शिकायत सामने आने के बाद एसपी आदित्य मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।
एसपी के आदेश पर किरनापुर थाना प्रभारी एवं उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को निलंबित कर दिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन भी किया गया है।
फिलहाल पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि थाने में वास्तव में क्या हुआ था और पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अगर किसी व्यक्ति से पूछताछ करनी भी हो, तो क्या कानून की सीमा लांघकर उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है? अब सबकी नजर एसआईटी की जांच और उसके निष्कर्ष पर है।

