‘सागर गोल्ड’ पर प्रतिबंध का आदेश चंद घंटों में वापस, SDM-SDOP पर गिरी गाज, 21 मौतों के बाद अवैध शराब के खिलाफ बड़ा अभियान

भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से 21 मौतों के बाद अब प्रशासन और आबकारी विभाग पर कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। एक तरफ ‘सागर गोल्ड’ शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया, लेकिन चंद घंटे बाद ही यह आदेश वापस ले लिया गया। वहीं दूसरी तरफ बंडा के SDM और SDOP को हटा दिया गया है। इस पूरे मामले के बाद अब मध्य प्रदेश में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के खिलाफ प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, सागर शराबकांड के बाद जबलपुर के सहायक आबकारी आयुक्त ने ‘सागर गोल्ड ब्रांड’ की शराब की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। लेकिन कुछ ही घंटे बाद आबकारी विभाग ने अपना ही आदेश निरस्त कर दिया। आदेश वापस लेने के पीछे जबलपुर जिले में इस ब्रांड की शराब की बिक्री नगण्य होने का हवाला दिया गया है। इस फैसले ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इधर सागर शराबकांड को लेकर बंडा में प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया गया है। बंडा के SDOP प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है, जबकि उनकी जगह रोहित लखारे को बंडा का SDOP बनाया गया है। वहीं SDM आरती यादव को भी हटाया गया है और संजय कुमार को बंडा SDM की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

सागर की घटना के बाद अब आबकारी विभाग को पूरे प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी सहायक आबकारी आयुक्तों और जिला आबकारी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर लगातार निगरानी की जाए। मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया जाए, अवैध शराब बनाने वाले ठिकानों पर दबिश दी जाए, संदिग्ध वाहनों की जांच हो और अवैध शराब के परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही लाइसेंसी शराब दुकानों और उनके परिसरों में गंभीर अनियमितता मिलने पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आबकारी आयुक्त ने साफ कहा है कि अभियान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसका मकसद सिर्फ कार्रवाई के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध शराब के निर्माण से लेकर उसकी बिक्री और परिवहन तक पूरी श्रृंखला पर प्रहार करना है।

सभी जिलों से अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन राज्य स्तरीय उड़नदस्ते को भेजना अनिवार्य किया गया है। वहीं विश्वसनीय सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने या गंभीर मामलों की अनदेखी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि सागर जिले के बंडा में 5 सितंबर की रात जहरीली शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। इस घटना में 21 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, जबकि 120 से ज्यादा लोगों का इलाज जारी बताया गया है। घटना के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई और विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाते हुए आबकारी मंत्री के इस्तीफे और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।

शराबकांड के बाद सरकार ने भी कई स्तरों पर कार्रवाई की है। मामले में अब तक 25 से ज्यादा लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। आबकारी उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। वहीं सहायक आयुक्त आबकारी सागर कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा आबकारी उप निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित किया गया है।

इसके अलावा सागर के गूगरा चौकी प्रभारी और बंडा थाना प्रभारी को भी निलंबित कर दिया गया है। यानी जहरीली शराब की इस घटना के बाद प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

वहीं मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला सागर पहुंचे और अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से भी मरीजों के इलाज और स्थिति के बारे में जानकारी ली। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 21 लोगों की जान जाने के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई क्या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाएगी? ‘सागर गोल्ड’ पर रोक का आदेश कुछ घंटों में वापस क्यों लिया गया और इस पूरे मामले में आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसका जवाब मजिस्ट्रियल जांच और आगे होने वाली कार्रवाई से सामने आने की उम्मीद है।

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