राहुल गांधी का इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम, मिशन 2028 के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव!

 भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुख्य आतिथ्य में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम होने जा रहा है। कार्यक्रम की परमिशन को लेकर करीब 15 दिनों से चल रही सियासी उठापटक के बाद आखिरकार कांग्रेस को रीजनल पार्क के सामने आइडिया की जमीन 10 लाख रुपए किराए पर मिल गई है। अब इस बड़े आयोजन के जरिए कांग्रेस एक साथ कई सियासी निशाने साधने की तैयारी में है।

कांग्रेस का पूरा फोकस इस समय युवाओं पर है। पार्टी ‘मिशन 2028’ के तहत युवा वोटर्स के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और इसके लिए राहुल गांधी को मैदान में उतारा जा रहा है। इंदौर को इस आयोजन के लिए चुनने की सबसे बड़ी वजह है कि यह मध्य प्रदेश का बड़ा एजुकेशन हब है। मालवा और निमाड़ से लेकर महाकौशल तक बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए इंदौर में रहते हैं। ऐसे में कांग्रेस की रणनीति है कि इंदौर के मंच से प्रदेश के युवाओं के बड़े वर्ग तक सीधे पहुंच बनाई जाए। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया का कहना है कि कांग्रेस युवाओं को जोड़ने और उनकी आवाज को बुलंद करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इस आयोजन का एक बड़ा राजनीतिक कनेक्शन मालवा-निमाड़ से भी जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश की राजनीति में मालवा-निमाड़ को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस क्षेत्र के चुनावी नतीजे प्रदेश की सत्ता के समीकरणों पर बड़ा असर डालते हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में इंदौर, खंडवा, देवास, बुरहानपुर, रतलाम और शाजापुर जैसे कई जिलों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था। ऐसे में इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम कर कांग्रेस इस पूरे क्षेत्र में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

कार्यक्रम का सीधा कनेक्शन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से भी जुड़ता है। इंदौर उनका गृह जिला है और प्रस्तावित आयोजन स्थल उनकी राऊ विधानसभा सीट में आता है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का गृह जिला धार भी इंदौर से सटा हुआ है। यही वजह है कि इस आयोजन को कांग्रेस के लिए सिर्फ एक छात्र कार्यक्रम नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाली कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है।

हालांकि बीजेपी इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बता रही है। बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी पवन दुबे का कहना है कि कांग्रेस हमेशा राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस तरह के आयोजनों का सहारा लेती रही है, लेकिन जनता उनकी हकीकत जानती है।

अगर चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कुल 66 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, राजगढ़, सीहोर, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी और बुरहानपुर जैसे जिले शामिल हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में इन 66 सीटों में कांग्रेस ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 28 सीटें मिली थीं और 3 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई थीं। लेकिन 2023 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस सिमटकर सिर्फ 17 सीटों पर रह गई। वहीं रतलाम की सैलाना सीट भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी के खाते में चली गई।

ऐसे में कांग्रेस का प्लान साफ नजर आता है। इंदौर के एजुकेशन हब के जरिए प्रदेशभर के युवाओं तक पहुंच बनाना, राहुल गांधी के जरिए युवा वोटर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करना और मालवा-निमाड़ में कांग्रेस की कमजोर होती राजनीतिक जमीन को दोबारा मजबूत करना। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 19 सितंबर का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कांग्रेस के मिशन 2028 को कितनी मजबूती देता है और क्या राहुल गांधी का यह यूथ कनेक्ट मालवा-निमाड़ में कांग्रेस के लिए सियासी संजीवनी साबित हो पाएगा?

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