इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस! CM मोहन बोले- खूबसूरत भवनों में दिखती है इंजीनियरों की कला साधना

भोपाल। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 15 सितंबर को राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। कार्यक्रम में इंजीनियरों ने कहा कि राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही है और सरकार की योजनाओं से आम लोगों को भी लाभ मिल रहा है।

इसी कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर, एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच अधोसंरचना निर्माण को लेकर एमओयू भी किया गया। इसे अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया गया है। इस सहयोग के तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण जैसी तकनीकों पर काम किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को याद किया। उन्होंने कहा कि 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान देश की कई प्रतिभाओं ने राष्ट्र निर्माण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शानदार काम किया। उनकी बनाई संरचनाएं उनकी सोच और दूरदृष्टि को दर्शाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंजीनियर शब्द में उन्हें ‘इंजन’ का आभास होता है। इंजन का मतलब ऐसी शक्ति और क्षमता से है, जो पूरी ताकत लगाकर किसी व्यवस्था को संचालित करे। उन्होंने कहा कि आज देश आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और शासन के अलग-अलग विभाग भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं।

डॉ. मोहन यादव ने भारत की प्राचीन स्थापत्य कला का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में हजारों साल पुरानी ऐसी रचनाएं मौजूद हैं, जो आज भी हमारी कला और कौशल की मिसाल हैं। अजंता-एलोरा, भगवान कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और दिव्य प्रतिमाएं हमारी प्राचीन इंजीनियरिंग और कला साधना की याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संसद के निर्माण में भी मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक स्थापत्य परंपराओं से प्रेरणा ली गई है।

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार को भी आगे बढ़ा रहा है। रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी महान विभूतियों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि उनके योगदान से सुशासन, वीरता और टीम भावना की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा खुद संसाधन जुटाकर अधोसंरचना निर्माण करना महत्वपूर्ण पहल है। सीएसआईआर और एम्प्री के साथ मिलकर होने वाला यह नवाचार प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा दे सकता है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि लोक निर्माण विभाग देश के सर्वश्रेष्ठ विभागों में अपनी पहचान बनाएगा और मध्य प्रदेश सरकार नवाचारी विचारों को लगातार प्रोत्साहित करती रहेगी।

वहीं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और मध्य प्रदेश के विकास की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता है। हमारे इंजीनियर चुनौतियों के बीच नए रास्ते खोजने का काम कर रहे हैं।

मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं के जरिए नए विचार और नवाचार सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले नौ महीनों में प्रदेश के करीब 85 प्रतिशत इंजीनियर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुसार भोपाल में इंजीनियर्स की ट्रेनिंग के लिए संस्थान शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सीएसआईआर और एम्प्री के साथ हुए एमओयू के जरिए सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क बनाने जैसी नई तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। मध्य प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी के आधार पर विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता हमारी पहचान, नवाचार हमारी शक्ति और तकनीक हमारा भविष्य है। उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी अगले एक साल में करीब दो लाख करोड़ रुपए लागत के कार्य करेगा।

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग ने लोक कल्याण को अपने नवाचारों से जोड़ा है। सड़कें किसानों को बाजार, युवाओं को स्कूल और महिलाओं को रोजगार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी करीब 30 हजार करोड़ रुपए लागत के कार्य पूरे कर चुका है और सड़क निर्माण में रोड सेफ्टी के साथ आधुनिक तकनीकों पर भी विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले नौ महीनों में ब्लैक स्पॉट के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में तुलनात्मक रूप से कमी आई है। वहीं कार्यक्रम में भोपाल परिक्षेत्र के प्रमुख अभियंता आरएल वर्मा ने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन और उनके इंजीनियरिंग क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला।

अभियंता दिवस समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कई अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। ईश्वर सिंह चंदेली, मानवेंद्र सिंह सेंगर, मनीष कुमार शर्मा, अर्चित लाहौटी, अमन अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, नितिन बरसैया, राजेश दायमा, शशांक शर्मा, हर्षिता वार्ष्णेय, दीपक नामदेव, साहित्य तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, पुष्कल प्रताप, मोहन किशोर, महेंद्र डोलिया, शिवेंद्र सिंह, रामसिंह रघुवंशी और आशीष मंडल सहित कई इंजीनियरों का सम्मान हुआ। इसके अलावा सेवानिवृत्त लोक निर्माण सचिव सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को भी विशेष सम्मान दिया गया।

कुल मिलाकर अभियंता दिवस समारोह में सरकार ने साफ संकेत दिया कि मध्य प्रदेश में आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक और नवाचार पर खास जोर रहेगा। अब देखना होगा कि इन नई तकनीकों और योजनाओं का असर प्रदेश की सड़कों, सरकारी भवनों और अधोसंरचना के विकास में कितनी तेजी से दिखाई देता है।

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